Uttam Sanyam Das Lakshan Dharma Jain Festival Poster HD

जय जिनेन्द्र!

पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के छठवें दिन, आज, मंगलवार, 02 सितंबर 2025 को भाद्रपद शुक्ल दशमी के पावन अवसर पर हम उत्तम संयम धर्म की आराधना कर रहे हैं। आज के दिन को सुगंध दशमी के नाम से भी जाना जाता है। उत्तम संयम, जिसका अर्थ ‘सर्वोत्तम आत्म-नियंत्रण’ है, दसलक्षण धर्मों में एक ऐसा सिद्धांत है जो हमें इंद्रियों और मन को वश में रखने की प्रेरणा देता है।

उत्तम संयम: मनुष्य जीवन की सफलता

‘उत्तम संयम पाले ज्ञाता, नरभव सफल करे ले साता।’ – यह सूक्ति संयम के महत्व को दर्शाती है। इसका अर्थ है कि जिस मनुष्य ने अपने जीवन में संयम धारण कर लिया है, उसका मनुष्य जीवन सार्थक और सफल है। बिना संयम के, मुक्तिवधू कोसों दूर है।

संयम का पालन हमें अपनी इच्छाओं और वासनाओं को नियंत्रित करना सिखाता है। यह हमें यह समझने में मदद करता है कि हमारी इंद्रियाँ हमें बाहरी सुखों की ओर खींचती हैं, जो अंततः दुख का कारण बनते हैं। संयमी व्यक्ति अपनी आत्मा पर ध्यान केंद्रित करता है और जीवन की क्षणिक सुख-सुविधाओं से ऊपर उठकर आत्म-ज्ञान की ओर बढ़ता है।

उत्तम संयम: व्यक्तिगत, सामाजिक और विश्व कल्याण का आधार

उत्तम संयम का पालन केवल आत्म-विकास के लिए ही नहीं, बल्कि समाज और विश्व के लिए भी अत्यंत लाभकारी है।

  • व्यक्तिगत कल्याण: संयम हमें मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य प्रदान करता है। संयमी व्यक्ति अतिभोग से बचता है, जिससे बीमारियां कम होती हैं और वह अधिक ऊर्जावान महसूस करता है। मन को वश में रखने से तनाव और चिंता कम होती है, जिससे हमें आत्म-शांति मिलती है। मोक्ष मार्ग पर चलने के लिए इंद्रियों पर नियंत्रण आवश्यक है।

  • सामाजिक समरसता: जब समाज के लोग संयम का पालन करते हैं, तो वे अनावश्यक उपभोग, हिंसा और आपराधिक प्रवृत्तियों से दूर रहते हैं। संयमी व्यक्ति दूसरों के अधिकारों का सम्मान करता है और समाज में अनुशासन और शांति बनाए रखने में मदद करता है।

  • विश्व कल्याण और स्थिरता: आज विश्व में जो भी पर्यावरणीय समस्याएं, आर्थिक असमानता और संघर्ष हैं, उनका एक बड़ा कारण मनुष्य का उपभोग के प्रति असंयम है। जब हम अपनी आवश्यकताओं को सीमित करते हैं, तो प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कम होता है, जिससे पर्यावरण सुरक्षित रहता है। संयमी व्यक्ति प्रकृति का आदर करता है और उसे बर्बाद नहीं करता। यह विश्व शांति और स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।

सुगंध दशमी की कथा: पवित्रता का महत्व

सुगंध दशमी के दिन धूप खेवन का विशेष महत्व है। इस दिन की कथा हमें यह बताती है कि कैसे उत्तम संयम और पवित्रता दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

तीर्थंकर महावीर के समवशरण में गणधर गौतम स्वामी ने राजा श्रेणिक को राजा विजयसेन की बेटी राजकुमारी दुर्गन्धा की कहानी सुनाई। राजकुमारी के शरीर से हमेशा दुर्गंध आती थी। मुनिराज के कहने पर उसने श्रद्धापूर्वक सुगंध दशमी का व्रत किया। इस व्रत और संयम के पालन से उसकी दुर्गंध दूर हो गई और वह अत्यंत सुंदर हो गई। यह कथा हमें सिखाती है कि हमारे कर्म और हमारी इंद्रियों पर संयम का सीधा संबंध हमारी आंतरिक और बाहरी पवित्रता से है।

पर्युषण पर्व के छठवें दिन की पूजन विधि और महत्व

आज के दिन की पूजा, स्वाध्याय और जाप विधि हमें उत्तम संयम के सार को समझने में मदद करती है:

  • सिद्ध भगवान/देव, शास्त्र, गुरु पूजन: हम सिद्धों और गुरुओं की पूजा करते हैं जिन्होंने पूर्ण संयम का पालन कर मोक्ष प्राप्त किया।

  • चौबीसी पूजन (24 तीर्थंकर): तीर्थंकरों ने अपने जीवन में चरम संयम का पालन किया। उनकी पूजा हमें प्रेरणा देती है।

  • मूलनायक तीर्थंकर पूजन: अपनी श्रद्धा को मूलनायक भगवान के चरणों में समर्पित करें।

  • शीतलनाथ भगवान पूजन (धूप-दशमी): आज शीतलनाथ भगवान का पूजन विशेष रूप से किया जाता है। उनकी पूजा हमें शांति और संयम का संदेश देती है।

  • सोलह कारण पूजन: यह हमें आत्मा की शुद्धि और तीर्थंकर पद के लिए आवश्यक गुणों को समझने में मदद करता है।

  • दसलक्षण पूजन: दसलक्षण धर्मों की पूजा करके इन गुणों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लें।

  • स्वयंभू स्तोत्र: पूजन की समाप्ति के पहले, समुच्चय महा अर्घ के पहले, स्वयंभू स्तोत्र का पाठ प्रतिदिन करें। यह मन को एकाग्र करता है।

  • स्वाध्याय: धर्म ध्यान के लिए स्वाध्याय (शास्त्रों का अध्ययन), विशेष रूप से तत्त्वार्थसूत्र ग्रंथ के सभी 357 सूत्रों का शुद्ध पाठ अवश्य करें और प्रतिदिन एक अध्याय का स्वाध्याय करने से विशेष कर्मों की निर्जरा होती है।

और अंत में, “ॐ ह्रीं उत्तम संयम धर्मांड़गाय नमः” का जाप, हमें संयम को सिर्फ एक विचार नहीं, बल्कि एक व्यवहार बनाने की शक्ति देता है।

आइए, इस पावन दिन हम सब मिलकर संयम को अपने जीवन का आधार बनाएं और इस तरह व्यक्तिगत कल्याण के साथ-साथ समाज और विश्व कल्याण में भी अपना योगदान दें।

 

सुदीप जैन

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *