Uttam Brahmcharya Das Lakshan Dharma Jain Festival Poster HD

जय जिनेन्द्र!

पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के दसवें और अंतिम दिन, आज, शनिवार, 06 सितंबर 2025 को भाद्रपद शुक्ल अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर हम उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना कर रहे हैं। उत्तम ब्रह्मचर्य, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘ब्रह्म में रमण’ या ‘अपनी आत्मा में लीन रहना’ है, दसलक्षण धर्मों में एक ऐसा सिद्धांत है जो हमें विषयों से दूर रहकर, अपनी आत्मा को शुद्ध करने की प्रेरणा देता है।

उत्तम ब्रह्मचर्य: मोक्ष लक्ष्मी की प्राप्ति

‘उत्तम ब्रह्मचर्य मन लावे, नरसुर सहित मुक्ति फल पावें’। – यह सूक्ति ब्रह्मचर्य के महत्व को दर्शाती है। इसका अर्थ है कि उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का पालन करने वाले को मोक्ष लक्ष्मी की प्राप्ति अवश्य ही होती है।

ब्रह्मचर्य का अर्थ केवल शारीरिक शुचिता तक सीमित नहीं है। इसका गहरा अर्थ है अपनी आत्मा में रमण करना। राग और द्वेष को उत्पन्न करने वाले साधनों के होने पर भी, उन सब से विरक्त होकर आत्मानुमुखी बने रहना ही उत्तम ब्रह्मचर्य है। यह हमें यह सिखाता है कि सभी सांसारिक विषय और भौतिक सुख-सुविधाएं क्षणिक हैं। इन सबको छोड़कर, केवल अपनी आत्मा के द्वारा सुख का अनुभव करना ही उत्तम ब्रह्मचर्य की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

उत्तम ब्रह्मचर्य: व्यक्तिगत, सामाजिक और विश्व कल्याण का आधार

उत्तम ब्रह्मचर्य का पालन व्यक्ति से लेकर समाज और संपूर्ण विश्व के लिए अत्यंत लाभकारी है:

  • व्यक्तिगत कल्याण और मोक्ष: ब्रह्मचर्य का पालन हमें मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाता है। यह हमारी आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाता है और मन को एकाग्र करता है। कामुक विचारों से मुक्ति हमें आंतरिक शांति और असीम आनंद देती है। अपनी आत्मा में लीन रहना ही मोक्ष का द्वार है, क्योंकि यह हमें कर्मों के बंधन से मुक्त कर देता है। आज वासुपूज्य भगवान का मोक्ष कल्याणक है, जिनकी पूजा हमें ब्रह्मचर्य और मोक्ष की प्रेरणा देती है।

  • सामाजिक समरसता: जब समाज के लोग ब्रह्मचर्य के सिद्धांत को अपनाते हैं, तो उनके आपसी रिश्ते अधिक शुद्ध और प्रेमपूर्ण होते हैं। इससे पारिवारिक और सामाजिक जीवन में स्थिरता आती है। यह अनुशासन और नैतिकता को बढ़ावा देता है, जिससे एक स्वस्थ और संतुलित समाज का निर्माण होता है।

  • विश्व कल्याण: आज विश्व में जो भी यौन अपराध, हिंसा और अनैतिकता है, उसका एक बड़ा कारण ब्रह्मचर्य की कमी है। ब्रह्मचर्य का पालन हमें दूसरों के प्रति सम्मान और करुणा सिखाता है। यह हमें यह समझने में मदद करता है कि हम सब एक हैं और हमें मिलकर एक ऐसे समाज का निर्माण करना है, जहाँ हर कोई सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे।

उत्तम ब्रह्मचर्य की साधना का वैज्ञानिक पहलू

आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि आत्म-नियंत्रण और शुद्ध जीवनशैली मानसिक स्पष्टता और शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देती है। यह हमें अधिक ऊर्जावान और उत्पादक बनाती है।

पर्युषण पर्व के दसवें दिन की पूजन विधि और महत्व

आज के दिन की पूजा, स्वाध्याय और जाप विधि हमें उत्तम ब्रह्मचर्य के सार को समझने में मदद करती है:

  • सिद्ध भगवान पूजन: हम सिद्धों की पूजा करते हैं, जिन्होंने ब्रह्मचर्य का पालन कर मोक्ष प्राप्त किया।

  • देव, शास्त्र, गुरु/पंचपरमेष्ठी/नवदेवता पूजन: हम उन महान आत्माओं की आराधना करते हैं जिन्होंने हमें ब्रह्मचर्य का मार्ग दिखाया।

  • चौबीसी पूजन (24 तीर्थंकर): तीर्थंकरों ने अपने जीवन में पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन किया और परम ज्ञान को प्राप्त किया। उनकी पूजा हमें प्रेरणा देती है।

  • मूलनायक तीर्थंकर पूजन: अपनी श्रद्धा को मूलनायक भगवान के चरणों में समर्पित करें।

  • वासुपूज्य भगवान मोक्ष कल्याणक: आज पंच बालयतियों में प्रथम १२वें तीर्थंकर श्री वासुपूज्य भगवान का मोक्ष कल्याणक है। उनकी पूजा हमें ब्रह्मचर्य और मोक्ष की प्रेरणा देती है।

  • अनंतनाथ भगवान की पूजा: अनंत चौदस के दिन अनंतनाथ भगवान की पूजा की जाती है।

  • सोलह कारण पूजन: यह हमें आत्मा की शुद्धि और तीर्थंकर पद के लिए आवश्यक गुणों को समझने में मदद करता है।

  • दसलक्षण पूजन: दसलक्षण धर्मों की पूजा करके इन गुणों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लें।

  • रत्नत्रय पूजन: त्रयोदशी से पूर्णिमासी तक तीन दिनों तक रत्नत्रय की पूजा होती है।

  • स्वयंभू स्तोत्र: पूजन की समाप्ति के पहले, समुच्चय महा अर्घ के पहले, स्वयंभू स्तोत्र का पाठ प्रतिदिन करें। यह मन को एकाग्र करता है।
  • स्वाध्याय: धर्म ध्यान के लिए स्वाध्याय (शास्त्रों का अध्ययन), विशेष रूप से तत्त्वार्थसूत्र ग्रंथ के सभी 357 सूत्रों का शुद्ध पाठ अवश्य करें और प्रतिदिन एक अध्याय का स्वाध्याय करने से विशेष कर्मों की निर्जरा होती है।

और अंत में, “ॐ ह्रीं उत्तम ब्रह्मचर्य धर्मांड़गाय नमः” का जाप, हमें ब्रह्मचर्य को सिर्फ एक विचार नहीं, बल्कि एक व्यवहार बनाने की शक्ति देता है।

दशलक्षण पर्व के इस महान अवसर पर जो मनुष्य उपरोक्त दस धर्मों को अपना कर, उनका पालन करके अपने जीवन का उद्धार करता है तथा अपने आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करके अजर अमर पद निर्वाण की प्राप्ति कर सकता है। ये दसलक्षण पर्व इन्हीं दस धर्मों को जीवन में अंगीकार करने की प्रेरणा देता है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *