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श्री दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र, सिद्धवरकूट

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श्री दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र, सिद्धवरकूट

प्रस्तावना

श्री दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र, सिद्धवरकूट का ऐतिहासिक महत्व और इसकी प्राचीनता अत्यंत गहरी है, जो इसे जैन धर्म में एक अत्यंत पवित्र और केंद्रीय आध्यात्मिक स्थल बनाती है। जैन धर्म के पवित्र ग्रंथ निर्वाणकांड में इस पावन भूमि को 'सिद्ध क्षेत्र' (मोक्ष स्थली) के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी पवित्र तट पर दो चक्रवर्ती सम्राट (सनत्कुमार और मंधवा), दस कामदेव तथा साढ़े तीन करोड़ मुनिराजों ने तपस्या कर मोक्ष (परम निर्वाण) प्राप्त किया था। नर्मदा और कावेरी नदियों के सुंदर संगम के निकट एक रमणीय पहाड़ी पठार पर स्थित यह प्राचीन धरोहर, मध्यकाल के ऐतिहासिक उथल-पुथल के कारण सदियों तक भूमिगत (लुप्त) रही। इसके बाद, सन् 1878 ईस्वी (विक्रम संवत 1935) में इंदौर के भट्टारक महेंद्रकीर्ति जी महाराज को मिले एक दिव्य स्वप्न के माध्यम से इस गुप्त स्थल की खोज हुई। तत्पश्चात, यहाँ खुदाई में मिले प्राचीन अवशेषों और प्रतिमाओं के जीर्णोद्धार का कार्य आरंभ हुआ, जिसके परिणामस्वरूप सन् 1894 ईस्वी (विक्रम संवत 1951) में भव्य वेदी प्रतिष्ठा संपन्न हुई। शैक्षणिक और पुरातात्विक दृष्टिकोण से, सिद्धवरकूट मध्य भारत के धार्मिक इतिहास, पुरालेख (शिलालेख) विज्ञान और जैन मूर्तिकला के क्रमिक विकास का अध्ययन करने के लिए शोधकर्ताओं को एक अमूल्य मंच प्रदान करता है। यह मंदिर परिसर ऐतिहासिक साक्ष्यों का एक जीवंत दस्तावेज है, जहाँ मूलनायक भगवान संभवनाथ (तीसरे तीर्थंकर) के मुख्य मंदिर के अतिरिक्त, विक्रम संवत 11 (11वीं शताब्दी) के शिलालेख से युक्त भगवान आदिनाथ की अति-प्राचीन प्रतिमा और विक्रम संवत 1545 (सन् 1488 ई.) की भगवान चंद्रप्रभु की अनुपम मूर्ति विराजमान है। ये प्राचीन शिलालेख और यहाँ की कलाकृतियाँ तत्कालीन क्षेत्रीय शिल्पकला, दानदाताओं के इतिहास और मध्यकालीन लिपियों के अध्ययन में अत्यंत सहायक हैं। इसके अतिरिक्त, प्रसिद्ध हिंदू तीर्थ स्थल ओंकारेश्वर के ठीक समीप इस भव्य जैन तीर्थ की उपस्थिति, प्राचीन भारत में अंतर्धार्मिक सद्भाव, सांस्कृतिक सह-अस्तित्व और साझा पवित्र भौगोलिक परिदृश्यों (Shared Sacred Landscapes) का एक उत्कृष्ट शैक्षणिक उदाहरण प्रस्तुत करती है। यहाँ के 13 मंदिरों की वास्तुकला और परमार-कालीन कला का प्रभाव शोधार्थियों को मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक धरोहर संरक्षण को गहराई से समझने का अवसर देता है।

श्री दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र, सिद्धवरकूट