भगवान नेमिनाथ और गिरनार की पंचम टोंक: मोक्ष कल्याणक की दिव्य गाथा और ऐतिहासिक सत्य
जय जिनेन्द्र मित्रों, क्या आपने कभी बाइसवें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ जी के अद्भुत जीवन और गुजरात के गिरनार पर्वत (उर्जयन्त गिरि) की दुर्गम ऊँचाइयों पर घटित उनकी परम मोक्ष यात्रा के विषय में गहराई से चिंतन किया है? जैन दर्शन में गिरनार मात्र एक पर्वत नहीं है, बल्कि यह वह शाश्वत तीर्थ है जहाँ से […]
Is 'Moksha' an Escape from Life (Escapism)? — A Logical and Philosophical Analysis from the Perspective of Jain Philosophy and Modern Science

हाल ही में कुछ बौद्धिक विमर्शों और लेखों में यह तर्क देखने को मिला कि: “जीवन के दुखों से डरकर जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होने की चाह (मोक्ष) एक प्रकार का पलायनवाद (Escapism) है।” यह तर्क पहली नज़र में आधुनिक और ‘व्यावहारिक’ (Practical) लग सकता है। भौतिकवाद की दौड़ में भागती दुनिया को अक्सर […]
जैन दर्शन: एक शाश्वत, सार्वभौमिक सिद्धांत एवं संपूर्ण विज्ञान

भाग 1: जैन दर्शन की शाश्वतता एवं मौलिक पहचान 1.1 भ्रांतियों का निवारण: संस्थापक एवं उत्पत्ति आधुनिक विमर्श में जैन दर्शन की पहचान को लेकर दो मूलभूत भ्रांतियाँ प्रचलित हैं। प्रथम, यह कि जैन धर्म, हिन्दू (ब्राह्मण) धर्म की एक शाखा अथवा सुधारवादी आन्दोलन है; और द्वितीय, यह कि इस धर्म की स्थापना लगभग 2500 […]
भगवान महावीर जन्मभूमि – एक ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक विवेचना

एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व के रूप में, भगवान महावीर का अस्तित्व अकादमिक रूप से सुस्थापित है, तथापि उनके जन्म के सटीक स्थान को लेकर विभिन्न परम्पराओं में मतभेद रहा है। यह विवेचना पुरातात्विक साक्ष्यों, प्राचीनतम साहित्यिक स्रोतों और ऐतिहासिक संदर्भों के आधार पर इस प्रश्न का समाधान प्रस्तुत करती है कि क्या आधुनिक बिहार में वैशाली […]
Veer Nirvanotsav: The Authentic History and Spiritual Secrets of Jain Diwali

प्रस्तावना: शाश्वत ज्ञान एवं निर्वाण का आलोक दीपावली, जिसे सामान्यतः प्रकाश के पर्व के रूप में जाना जाता है, जैन परंपरा में एक अत्यंत गहन और विशिष्ट आध्यात्मिक अर्थ धारण करती है। यह बाह्य अंधकार पर बाह्य प्रकाश की विजय का उत्सव मात्र नहीं है, अपितु यह आत्मा के भीतर व्याप्त अज्ञान और कर्म के अंधकार […]
जैन मंदिर स्थापत्य का पुरातत्वीय और दार्शनिक विश्लेषण

परिचय यह रिपोर्ट प्राचीन भारतीय जैन मंदिरों का एक व्यापक, बहु-विषयक विश्लेषण प्रदान करती है। यह केवल एक वास्तुशिल्प सर्वेक्षण से आगे बढ़कर जैन मुक्ति-शास्त्र—विशेष रूप से वीतरागता (वैराग्य) की अवधारणा—और पवित्र स्थान में इसकी भौतिक अभिव्यक्ति के बीच गहरे सहजीवन का पता लगाती है। यह विश्लेषण जांच करता है कि जैन धर्म के मूल […]
A Study of Jain Temple Architecture and Philosophical Intent
Introduction This report provides a comprehensive, multi-disciplinary analysis of ancient Indian Jain temples. It moves beyond a mere architectural survey to explore the profound symbiosis between Jain soteriology—specifically the concept of Veetaragata (dispassion)—and its material expression in sacred space. This analysis investigates how the core tenets of Jainism, including Aparigraha (non-possessiveness) and Anekantavada (non-absolutism), are […]
Sant Shiromani Acharya Vidyasagar: The Epitome of Renunciation, Austerity, and Wisdom.

जय जिनेंद्र। संत शिरोमणि आचार्य गुरुवर 108 श्री विद्यासागर जी महामुनिराज का जीवन केवल एक जैन संत की यात्रा नहीं, बल्कि एक राष्ट्र संत का वह आध्यात्मिक रूप से समृद्ध युग था, जो ज्ञान, करुणा और सेवा की त्रिवेणी से सुशोभित था। उनका जीवन भगवान महावीर के आदर्शों का साक्षात प्रतीक था, एक ऐसा प्रकाश […]
उत्तम ब्रह्मचर्य: आत्मा में रमण और मोक्ष का महाद्वार

जय जिनेन्द्र! पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के दसवें और अंतिम दिन, आज, शनिवार, 06 सितंबर 2025 को भाद्रपद शुक्ल अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर हम उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना कर रहे हैं। उत्तम ब्रह्मचर्य, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘ब्रह्म में रमण’ या ‘अपनी आत्मा में लीन रहना’ है, दसलक्षण धर्मों में एक ऐसा सिद्धांत है […]
उत्तम आकिंचन्य: ममत्व का त्याग और परम समाधि का मार्ग

जय जिनेन्द्र! पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के नवें दिन, आज, शुक्रवार, 05 सितंबर 2025 को भाद्रपद शुक्ल त्रयोदशी के पावन अवसर पर हम उत्तम आकिंचन्य धर्म की आराधना कर रहे हैं। उत्तम आकिंचन्य का अर्थ ‘सर्वोत्तम अपरिग्रह’ या ‘कुछ भी मेरा नहीं’ का भाव है। यह दसलक्षण धर्मों में एक ऐसा सिद्धांत है जो हमें सिर्फ […]