उत्तम त्याग: निवृत्ति, निस्वार्थता और विश्व कल्याण का महापथ

जय जिनेन्द्र! पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के आठवें दिन, आज, गुरुवार, 04 सितंबर 2025 को भाद्रपद शुक्ल द्वादशी के पावन अवसर पर हम उत्तम त्याग धर्म की आराधना कर रहे हैं। उत्तम त्याग, जिसका अर्थ ‘सर्वोत्तम त्याग’ है, दसलक्षण धर्मों में एक ऐसा सिद्धांत है जो हमें केवल वस्तुओं का त्याग करने तक ही सीमित नहीं […]
उत्तम तप: इच्छाओं पर विजय, आत्म-शुद्धि और ज्ञान का आलोक

जय जिनेन्द्र! पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के सातवें दिन, आज, बुधवार, 03 सितंबर 2025 को भाद्रपद शुक्ल एकादशी के पावन अवसर पर हम उत्तम तप धर्म की आराधना कर रहे हैं। उत्तम तप, जिसका अर्थ ‘सर्वोत्तम तपस्या’ है, दसलक्षण धर्मों में एक ऐसा सिद्धांत है जो हमें इच्छाओं पर विजय प्राप्त करके आत्म-शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति […]
उत्तम संयम: मनुष्य जीवन की सफलता और मोक्ष का आधार

जय जिनेन्द्र! पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के छठवें दिन, आज, मंगलवार, 02 सितंबर 2025 को भाद्रपद शुक्ल दशमी के पावन अवसर पर हम उत्तम संयम धर्म की आराधना कर रहे हैं। आज के दिन को सुगंध दशमी के नाम से भी जाना जाता है। उत्तम संयम, जिसका अर्थ ‘सर्वोत्तम आत्म-नियंत्रण’ है, दसलक्षण धर्मों में एक ऐसा […]
उत्तम सत्य: निष्पक्षता, विश्वास और विश्व कल्याण का आधार

जय जिनेन्द्र! पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के पांचवें दिन, आज, सोमवार, 01 सितंबर 2025 को भाद्रपद शुक्ल नवमी के पावन अवसर पर हम उत्तम सत्य धर्म की आराधना कर रहे हैं। उत्तम सत्य, जिसका अर्थ है ‘सर्वोत्तम सत्य’ या ‘सत्यनिष्ठा’, दसलक्षण धर्मों में एक ऐसा सिद्धांत है जो हमें केवल सच बोलने तक ही सीमित नहीं […]
उत्तम शौच: संतोष, पवित्रता और विश्व शांति का पावन पर्व

जय जिनेन्द्र! पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के चौथे दिन, आज, रविवार, 31 अगस्त 2025 को भाद्रपद शुक्ल अष्टमी के पावन अवसर पर हम उत्तम शौच धर्म की आराधना कर रहे हैं। इस दिन को नि:शल्य अष्टमी भी कहा जाता है, जो मन से काँटे (शल्य) निकालने का प्रतीक है। उत्तम शौच, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘सर्वोत्तम पवित्रता’ […]
उत्तम आर्जव: सरलता, निष्कपटता और प्रकृति संरक्षण का पावन पथ

जय जिनेन्द्र! पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन, आज, शनिवार, 30 अगस्त 2025 को भाद्रपद शुक्ल सप्तमी के पावन अवसर पर हम उत्तम आर्जव धर्म की आराधना कर रहे हैं। इस दिन को शील सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है, जो शील और सरलता के महत्व को दर्शाता है। उत्तम आर्जव, जिसका अर्थ […]
उत्तम मार्दव: विनम्रता की शक्ति और आत्मा के विकास का मार्ग

जय जिनेन्द्र! पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के दूसरे दिन, आज भाद्रपद शुक्ल षष्ठी के पावन अवसर पर हम उत्तम मार्दव धर्म की आराधना कर रहे हैं। उत्तम मार्दव का शाब्दिक अर्थ है आत्मा के सर्वश्रेष्ठ पुरुषार्थ से मान कषाय का मर्दन करना अथवा अहंकार को पूरी तरह से अपने मन से हटाना। उत्तम मार्दव, जिसका भावार्थ है […]
उत्तम क्षमा: आत्म-शुद्धि का प्रथम सोपान और विश्व कल्याण का आधार

जय जिनेन्द्र! पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व, जिसे ‘पर्वों का राजा’ कहा जाता है, दस दिनों की एक आध्यात्मिक यात्रा है। यह हमें आत्मा से जोड़ने और विकारों को दूर करने का एक सुनहरा अवसर प्रदान करता है। इस महान पर्व का पहला दिन उत्तम क्षमा के लिए समर्पित है, जो कि दसलक्षण धर्मों में सबसे महत्वपूर्ण […]
राष्ट्रीय प्रतीक का छिपा जैन रहस्य: क्या यह अशोक स्तंभ नहीं, ‘वीर शासन स्तंभ’ है?
भारत का राष्ट्रीय प्रतीक — यह केवल एक राष्ट्र का चिह्न नहीं, बल्कि धर्म, सत्य और आत्म-विजय की एक अनन्त घोषणा है। हम इसे अपने सिक्कों, नोटों और सरकारी दस्तावेजों पर हर दिन देखते हैं, लेकिन क्या हम इसके पीछे छिपे गहरे अर्थ को पूरी तरह से समझते हैं? आपने इसको कई बार देखा होगा […]
भगवान महावीर स्वामी: एक शाश्वत प्रकाश-स्तंभ | Life & Teachings of the 24th Tirthankara

परिचय (Introduction): जय जिनेन्द्र! आज हम जैन धर्म के चौबीसवें और अंतिम तीर्थंकर, भगवान महावीर स्वामी के जीवन और उनकी कालजयी शिक्षाओं की यात्रा पर चलेंगे। भगवान महावीर केवल एक ऐतिहासिक महापुरुष ही नहीं, बल्कि अहिंसा, सत्य और आत्म-संयम के जीवंत प्रतीक हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि कैसे कोई आत्मा पुरुषार्थ के बल […]